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उत्तराखंड से संबंधित समस्त जानकारी इंटरनैट पर लाने का संकल्प लिये एक अदना सा व्यक्ति। अपने फोरम और मेरा पहाड़ के साथ प्रयासरत।

One response to “छाना बिलौरी कै भलो लांगुं, छाना बिलौरी का ज्वाना”

  1. किसी संस्कृति कर्मी का अपनी संस्कृति के प्रति क्या कर्तव्य और दायित्व होता है, उसे गोपाल दा ने चरितार्थ किया है। आज के संस्कृति कर्मी जिस तरह से पैसे के लिये स्तरहीन होते जा रहे हैं…उन्हें इससे प्रेरणा लेनी चाहिये।

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